रेपो रेट और इसकी कार्यप्रणाली के बारे में एक व्यापक मार्गदर्शिका
- ROSS

- Jan 1
- 2 min read

रेपो रेट क्या है? (What is Repo Rate?)
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक देश के बैंकों को short-term loan देता है।
अब ध्यान से समझो:
बैंक जब पैसों की कमी में होते हैं
तो वे RBI से पैसा उधार लेते हैं
उस उधार पर जो ब्याज लगता है = रेपो रेट
सीधी भाषा में: RBI = देश का “बैंक ऑफ बैंक्स”रेपो रेट = बैंकों के लिए funding cost
आम लोग सीधे RBI से लोन नहीं लेते लेकिन RBI की दर → बैंक की दर → आपकी EMI
अगर यह कनेक्शन नहीं समझा, तो पूरी finance literacy अधूरी है।
रेपो रेट कैसे काम करता है? (Working Mechanism)
अब यहाँ ज़्यादातर लोग गलती करते हैं, इसलिए ध्यान दो:
Step-by-step सिस्टम:
RBI रेपो रेट बढ़ाता या घटाता है
बैंक उसी हिसाब से अपनी loan interest rate adjust करते हैं
Market में पैसा महँगा या सस्ता होता है
इसका सीधा असर:
Home Loan
Personal Loan
Business Loan
MSME Loan
Two Scenarios:
🔺 जब रेपो रेट बढ़ता है:
बैंक के लिए पैसा महँगा
Loan interest ↑
EMI ↑
Demand ↓
🔻 जब रेपो रेट घटता है:
बैंक को सस्ता पैसा
Loan interest ↓
EMI ↓
Borrowing ↑
RBI यह सब inflation control और economic balance के लिए करता है, न कि लोगों को खुश करने के लिए।
रेपो रेट का EMI पर असर (Impact on EMI)
अब सबसे जरूरी हिस्सा — आपकी जेब।
Floating Rate Loans में:
Home Loan
Business Loan
MSME Loan
👉 रेपो रेट बदला = EMI बदली (या tenure बदला)
Example (सरल लेकिन सटीक):
Loan: ₹30 लाख
Interest: 8.5%
EMI ≈ ₹26,000
अगर रेपो रेट ↑ और interest 9.25% हो गया:
EMI ≈ ₹28,000
₹2,000/month = ₹24,000/year, 20 साल में = ₹4–5 लाख extra
और लोग कहते हैं:
“Interest rate थोड़ी ही बढ़ी है”
❌ यही सोच आपको महँगा Loan दिलाती है।
Final Reality Check (Read This Twice)
रेपो रेट कोई news headline नहीं है
यह loan planning का foundation है
EMI समझे बिना loan लेना = अंधेरे में decision
अगर आप:
Loan लेने की सोच रहे हो
EMI already चल रही है
Business finance manage कर रहे हो
तो रेपो रेट ignore करना बेवकूफी है, strategy नहीं।



Comments